दृढ़ बने रहने पर शिक्षा!

श्रीमान डार्बी के “हार्ड नॉक विश्वविद्यालय” से अपनी डिग्री प्राप्त करने और सोने के खनन के कारोबार में अपने अनुभव से लाभ उठाने का फैसला करने के तुरंत बाद ही, उनके पास एक अवसर पर सौभाग्य उपस्थित था, जिसने उनके सामने साबित किया कि जरूरी नहीं कि “नहीं” का मतलब नहीं हो। एक दोपहर वह एक पुराने जमाने की चक्की में गेहूं पीसने में अपने अंकल की मदद कर रहे थे। अंकल एक बड़ा खेत संचालित करते थे जिस पर बहुत से काले बटाईदार किसान रहते थे। बहुत धीरे से दरवाजा खला और एक छोटी सी काली बच्ची, बटाईदार की बेटी, अंदर आई और दरवाजे के पास खड़ी हो गयी। अंकल ने ऊपर नजर घुमाई, बच्चे को देखा, और बुरी तरह से उस पर चिल्लाकर बोले “तुम क्या चाहती हो?” बच्ची ने नर्मी से जवाब दिया, “मेरी मां कहती है उसे पचास सेंट भेज दो।” “मैं ऐसा नहीं करूँगा”, अंकल ने जवाब दिया “अब तुम घर भागो।” “हाँ,” बच्ची ने उत्तर दिया। लेकिन वह गई नहीं। अंकल अपने काम में लग गए, वह अपने काम में इतने व्यस्त हो गए कि उन्होंने यह देखने पर जरा भी ध्यान नहीं दिया कि वह बच्ची गई नहीं हैं। जब उन्होंने दोबारा ऊपर देखा और उसे अभी भी वहाँ खड़े देखा, तो वह उस पर चिल्लाए “मैंने तुम्हे अपने घर जाने के लिए कहा था! अब जाओ, नहीं तो मैं तुम्हारे पास आता हूँ।” छोटी लड़की ने कहा, “ठीक है,” लेकिन वह एक इंच भी नहीं हिली। अंकल ने अनाज की बोरी जिसे वह मिल हॉपर में डालने वाले थे, पटक दी बैरल का एक डंडा उठाया, और अपने चेहरे पर कठोरता के संकेत की एक अभिव्यक्ति के साथ बच्चे की ओर बढ़ना शुरू कर दिया!

डार्बी ने अपनी सांस रोकी। वह निश्चिन्त था वह एक हत्या का गवाह बनने वाला है। वह जानता था कि उसके अंकल का गुस्सा तेज है। वह जानता था कि देश के उस हिस्से में काले बच्चों से गोरे लोगों की बात का विरोध करने की उम्मीद नहीं की जाती थी। जब अंकल उस जगह पहुंचे जहाँ वह बच्ची खड़ी थी, उसने तुरंत एक कदम आगे बढ़ा दिया. ऊपर उनकी आँखों में देखा, और अपनी तीखी आवाज में परे जोर से चिल्लाई “मेरी माँ को वो पचास सेंट चाहिए!” अंकल रुक गए, एक मिनट के लिए उसे देखा, फिर धीरे धीरे बैरल वाला डंडा फर्श पर रख दिया, अपने हाथ अपनी जेब में डाले, आधा डॉलर बाहर निकाला, और उसे द दिया। बच्ची ने पैसे ले लिए और उस व्यक्ति पर से, जिस पर उसने अभी-अभी विजय प्राप्त की थी, अपनी आँखें बिलकुल हटाये बिना धीरे से वापस दरवाजे की ओर चली गई!

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