आस्था से प्रेरित करने पर चर्चा!

सभी युगों में, धर्मनिष्ठ लोगों ने मानवता के लिए संघर्ष कर इसमें और अन्य सिद्धांतों या पंथ, में “विश्वास करने” के लिए चेताया है, लेकिन वे लोगों को यह बताने में नाकाम रहे हैं कि विश्वास कैसे विकसित करें। उन्होंने यह नहीं कहा कि, “आस्था दिमाग की एक अवस्था है जो स्वत: सुझाव के सिद्धांत के माध्यम से प्रेरित की जा सकती है” उस भाषा में जिसे कोई भी सामान्य इंसान समझ सकता है, हम उस सब का वर्णन करेंगे जिसे सिद्धांत के बारे में जाना जाता है जिसके माध्यम से वहां विश्वास विकसित किया जा सकता है, जहां यह पहले से ही मौजद नहीं है। अपने पर विश्वास रखो; अनंत में आस्था रखो हम शुरू करें इससे पहले, आप को फिर से याद दिलाया जाना चाहिए कि: आस्था “अनन्त अमृत” है जो विचारों के आवेग को जीवन, शक्ति, और क्रियाशीलता प्रदान, करता है! पूर्वगामी वाक्य एक दूसरी, तीसरी और चौथी बार पढ़ने लायक है। यह जोर से पढ़ने लायक है! आस्था सभी धन संचय का प्रारंभिक बिंदु है! आस्था सभी “चमत्कारों” और सभी रहस्यों का आधार है जिसे विज्ञान के नियमों से विश्लेषित नहीं किया जा सकता है! आस्था विफलता का एकमात्र ज्ञात इलाज है! आस्था वह “रासायनिक” तत्व है, जो, प्रार्थना के साथ मिश्रित होकर, अनंत बुद्धि के साथ एक सीधा संचार स्थापित कर देती है! आस्था वह तत्व है जो मनुष्य के परिमित मष्तिस्क द्वारा निर्मित विचारों के साधारणव्कंपन को आध्यात्मिक समतुल्य में बदल देता है। आस्था ही एकमात्र माध्यम है जिसके माध्यम से अनंत प्रज्ञा की ब्रह्मांडीय शक्ति मनुष्यबीद्वारा साजबद्ध और इस्तेमाल की जा सकती है। उपरोक्त बयान का हर कोई प्रमाण देने में सक्षम है! प्रमाण सरल हैं और आसानी से प्रदर्शित किये जा सकते हैं। इसे स्वतः सुझाव के सिद्धांत में लपेटा जाता है। इसलिए चलिए हम, अपना ध्यान आत्म-सुझाव के विषय पर केन्द्रित करते हैं, और ज्ञात करते हैं यह क्या है और यह क्या प्राप्त करने में सक्षम है। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि एक व्यक्ति, जो अपने आत्म को बार-बार दोहराता है चाहे वह बयान सत्य हो या झूठ, अंत में, वह व्यक्ति उस पर विश्वास करने लगता है। यदि एक आदमी एक झूठ को बार-बार दोहराता है, तो वह अंत में झूठ को सत्य के रूप में स्वीकार कर लेगा। इसके अलावा, वह इसके सच होने का विश्वास करेगा। हर आदमी, वह जो भी है उस प्रभुत्वशाली विचार की वजह से है जिसे वह अपने दिमाग को वश में करने की अनुमति देता है। वह विचार जिसे एक आदमी जान-बूझकर अपने मन में रखता : है, और सहानुभूति के साथ प्रोत्साहित करता है, और जिसके साथ वह किसी एक या एक से अधिक भावनाओं को मिश्रित करता है, प्रेरक शक्तियों का गठन करता है, जो उसकी हर गतिविधि, कार्यवाही, और कर्म को निर्देशित और नियंत्रित करता है।


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