आत्मविश्वास पर शिक्षा चर्चा!

मैं इस सूत्र पर अपने नाम का हस्ताक्षर करूँगा, इसे याद रखूगा, और हर दिन एक बार जोर से इस पूर्ण विश्वास के साथ दोहराऊंगा, कि यह धीरे-धीरे मेरे विचारों और कार्यों को प्रभावित करेगी जिससे मैं एक आत्मनिर्भर, और सफल व्यक्ति बन जाऊंगा। इस सूत्र के पीछे प्रकृति का जो नियम है कोई भी आदमी अभी तक उसकी व्याख्या करने में सक्षम नहीं हुआ है। इसने सभी युगों के वैज्ञानिकों को चकित किया है। मनोवैज्ञानिकों ने इस नियम का नाम “आत्मसुझाव,” दिया है और इसे उस पर चलने दिया है। नाम जिसके द्वारा एक व्यक्ति यह नियम को बुलाता है कम महत्व का है। इसके बारे में महत्वपूर्ण तथ्य यह है- यदि इसका रचनात्मक प्रयोग किया जाता है, तो यह मानव जाति की महिमा और सफलता के लिए काम करता है। वहीं दूसरी ओर, यदि विध्वंसपर्ण इस्तेमाल किया जाता है, तो यह बड़ी ही आसानी से नष्ट कर देगा। इस बयान में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सच्चाई पाई जा सकती है अर्थात उनके जो हार गए हैं. और उनका जीवन गरीबी, दुख, और संकट में समाप्त हो गया है ऐसा आत्मसुझाव के सिद्धांत के नकारात्मक आवेदन के कारण हुआ है! इसका कारण इस तथ्य में पाया जा सकता है कि विचार के सभी आवेगों की खुद को अपने भौतिक समतुल्य में बदलने की प्रवृत्ति होती है। अवचेतन मन, (वह रासायनिक प्रयोगशाला जिसमें सभी विचार आवेगों को संयुक्त किया, और भौतिक वास्तविकता में बदलने के लिए तैयार किया जाता है), रचनात्मक और विनाशकारी विचार आवेगों के बीच कोई अंतर नहीं करता है। यह हमारे विचार आवेगों के माध्यम से उस सामग्री के साथ काम करता है जो हम इसे खिलाते हैं!अवचेतन मन भय से संचालित एक विचार को हकीकत में बदल देगा उतनी ही सरलता से जितनी सरलता से साहस, या विश्वास के द्वारा संचालित एक विचार को यह हकीकत में बदल देगा। चिकित्सा इतिहास के पृष्ठ “सांकेतिक आत्महत्या के मामलों के उदाहरणों से संपन्न हैं। एक आदमी नकारात्मक सझाव के माध्यम से उतने ही प्रभावी रूप से आत्महत्या कर सकता है, जितना किसी अन्य माध्यम से। एक मध्य-पश्चिमी शहर में, एक जोसेफ ग्रांट नाम के व्यक्ति, एक बैंक अधिकारी ने, निर्देशकों की सहमति के बिना, बैंक के पैसे की एक बड़ी राशि “उधार” ली। उसने जुए के माध्यम से पैसा खो दिया। एक दोपहर, बैंक परीक्षक आये और खातों की जांच करना शुरू किया। ग्रांट ने बैंक छोड़ दिया, एक स्थानीय होटल में एक कमरा ले लिया, और जब तीन दिन बाद उन्होंने उसे खोज लिया, वह बिस्तर में पड़ा था, रोते और कराहते हुए, बार-बार इन शब्दों को दोहरा रहा था “हे भगवान, यह मुझे मार डालेगा! मैं यह अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता”। थोड़े समय में वह मर गया!

डॉक्टरों ने इस मामले को एक स्पष्ट “मानसिक आत्महत्या” कहा। जैसे बिजली यदि रचनात्मक तरह से इस्तेमाल की जाये, उद्योग के पहियों को चलाती है, और उपयोगी सेवाएँ प्रस्तुत करती है, या यदि गलत तरीके से इस्तेमाल की जाए, जीवन नष्ट कर देती है; इसी प्रकार इसके बारे में आपकी समझ और अनुप्रयोग की मात्रा के अनुसार, आत्मसुझाव आपको शांति और समृद्धि की ओर या नीचे दुख, विफलता, और मौत की घाटी में ले जाता है। यदि आप अपने दिमाग को भय, शक, और अनंत बुद्धि की शक्ति के साथ जोड़ने और उसका प्रयोग करने की आपनी योग्यता में अविश्वास से भर देते हैं, तो आत्मसझाव का नियम इस अविश्वास की भावना को ग्रहण कर लेगा और एक पैटर्न के रूप में इसका प्रयोग करेगा जिसके द्वारा आपका अवचेतन मन इसे भौतिक समतुल्य में बदल देगा। यह कथन उतना ही सच है जितना दो और दो चार का कथन है!

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